Showing posts with label मेरे मालिक तू बता दे क्यों बना ऐसा जहॉं. Show all posts
Showing posts with label मेरे मालिक तू बता दे क्यों बना ऐसा जहॉं. Show all posts

Wednesday, 9 November 2011

मेरे मालिक तू बता दे क्यों बना ऐसा जहॉं .......




मेरे मालिक तू बता दे क्यों बना ऐसा जहॉं ।
सच को लाओ सामने तो दुश्मनी होती यहॉं ।।

ख्वाब बचपन में जो देखा वो अधूरा रह गया ।
अनवरत जीने की खातिर दे रहा हूं इम्तहां ।।

मुतमइन कैसे रहूं जब घर पङोसी का जले । 
है फरिश्ता दूर में अब आदमी मिलता कहॉं ।।

हर कोई बेताब अपनी बात कहने के लिए ।
सोच की धरती अलग पर सब दिखाता आसमां ।।

गम नहीं इस बात का कि लोग भटके राह में । 
हो अगर एहसास जिन्दा छोड़ जायेगा निशां ।।

मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं ।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां ।।

मिलती है खुशबू सुमन को रोज अब खेरात में ।
जो फकीरी में लुटाते अब यहॉं फिर कल वहॉं ।।

!!!!!!!!!!!!!!!!!!!Anurag Srivastava!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!